प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता में आई आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी गई है. हालांकि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार को खतरा नहीं है, लेकिन राजनीति में रूचि रखने वालों के मन में ये सवाल उठना लाजमी है कि आखिर किस शख्स की वजह से इतना बड़ा मुद्दा नजरों में आया और सत्ताधारी दल के इतने सारे विधायकों का निलंबन हो गया. लाभ के पद पर काबिज होने के चलते चुनाव आयोग ने आप के 20 विधायकों को अयोग्य घोषित कर अपनी सिफारिश राष्ट्रपति को सौंपी थी.

राष्ट्रपति ने इसे अपनी मंजूरी दे दी है. आप के 20 विधायकों का निलंबन होने के बाद इन सभी सीटों पर उपचुनाव होना लगभग तय माना जा रहा है. 20 सीटों पर उपचुनाव की संभावना को देखते हुए बीजेपी और कांग्रेस अपने लिए दिल्ली की राज्य स्तरीय राजनीति में हैसियत बढ़ाने की कोशिश करेगी.

आपको जानकर ताज्जुब होगा कि दिल्ली में इतना बड़ा राजनीतिक हलचल पैदा करने वाले शख्स एक युवा वकील प्रशांत पटेल हैं. आइए इस युवा वकील से जुड़ी 10 बातें जानते हैं.

1. AAP विधायकों के खिलाफ तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास युवा वकील प्रशांत पटेल ने अर्जी डाली थी. सितंबर 2015 में उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सामने याचिका दायर कर संसदीय सचिवों की गैरकानूनी नियुक्ति पर सवाल खड़े किए थे.

2. प्रशांत मूल रूप से फतेहपुर के रहने वाले हैं. हालांकि उनका ज्यादातर जीवन इलाहाबाद में बीता है. 30 साल के प्रशांत ने साल 2015 में वकालत शुरू की थी.

3. प्रशांत पटेल ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीएससी के बाद नोएडा के एक कॉलेज से एलएलबी की है.

4. प्रशांत बॉलीवुड एक्टर आमिर खान और डायरेक्टर राजकुमार हिरानी के खिलाफ भी फिल्म ‘PK’ में हिंदू देवी देवताओं का गलत चित्रण करने को लेकर FIR दर्ज कराने के बाद पहली बार सुर्खियों में आए थे.

5. आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के खिलाफ लाभ का पद मामले में जुलाई 2015 में याचिका दायर करने वाले वकील ने कहा है कि इसके लिये उन्हें एक पुस्तक से प्रेरणा मिली थी.

6. प्रशांत पटेल ने कहा, ‘जुलाई 2016 से मार्च 2017 के बीच 11 सुनवाई हुई और प्रत्येक सुनवाई 2-3 घंटे चली.’ पटेल को इंदिरा जयसिंह जैसी वरिष्ठ अधिवक्ताओं का सामना करना पड़ा, जिन्होंने दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व किया. कई अन्य शीर्ष वकीलों ने बीजेपी और कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया.

7. आप ने इससे पहले पटेल की याचिका को बीजेपी के इशारे पर दायर किया हुआ बताया था. पटेल ने इन आरोपों को खारिज कर दिया.

8. पटेल ने आम आदमी पार्टी के उन आरोपों को भी आधारहीन बताया जिसमें कहा गया कि संसदीय सचिव बने विधायकों को एक रुपये भी नगद पैसे नहीं दिए गए, ऐसे में यह लाभ का पद नहीं है.

9. इस बारे में प्रशांत पटेल ने कहा कि सीधे तौर पर पैसे लेना ही लाभ का पद नहीं है. उन्होंने कहा कि संसदीय सचिव बनने के बाद इन विधायकों ने सरकारी फाइलों को देखा और इस आधार पर निजी कंपनियों को टेंडर भी जारी किए.

10. प्रशांत ने कहा कि इस बार में दिल्ली सरकार के ही मुख्य सचिव ने आयोग में 1200 पन्नों का दस्तावेज पेश किया. जिसमें यह बताया गया कि कौन से संसदीय सचिव ने किन फाइलों का मुआयना किया और ठेका जारी किया. जबकि उनको अधिकार नहीं है.

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