रक्षा मंत्रालय

समंदरों में दुश्मनों की अब होगी ”नो एंट्री”, खरीदे जाएंगे 111 हेलीकॉप्टर रक्षा मंत्रालय ने दी मंजूरी

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार (31 अक्टूबर) को भारतीय नौसेना के लिए 21,738 करोड़ रुपये में 111 हेलीकॉप्टर खरीद सौदे को मंजूरी दे दी. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में लंबे समय से लटके पड़े इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.

उन्होंने कहा कि 16 हेलीकॉप्टर तैयार स्थिति में ही खरीदे जायेंगे, जबकि शेष 95 हेलीकॉप्टरों का विनिर्माण एवं उत्पादन भारत में ही किया जाएगा. यह सौदा रणनीतिक भागीदारी मॉडल के तहत होगा. सरकार अब किसी विदेशी हेलीकॉप्टर विनिर्माता कंपनी तथा उसके साथ संयुक्त उद्यम में शामिल होने के लिए एक भारतीय कंपनी की तलाश प्रक्रिया शुरू करेगी. सरकार ने इस मॉडल की शुरुआत मई में की थी. इस नये मॉडल के तहत यह पहला बड़ा सौदा होगा.

सेना ने आधुनिकीकरण के लिए बड़े पैमाने पर खरीदारी की योजना बनाई

इससे पहले सेना ने बीते रविवार (29 अक्टूबर) को अपने आधुनिकीकरण के लिए सबसे बड़ी खरीद योजनाओं में से एक को अंतिम रूप दिया था. इसके तहत बड़ी संख्या में हल्की मशीन गन, कार्बाइन और असॉल्ट राइफलों को करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत से खरीदा जा रहा है. नए हथियार पुराने और चलन से बाहर हो चुके हथियारों की जगह लेंगे.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया था कि करीब सात लाख राइफल, 44,000 लाइट मशीन गन (एलएमजी) और करीब 44,600 कार्बाइन की खरीद की विस्तृत प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया गया है. खरीद प्रक्रिया पर आगे बढ़ने में रक्षा मंत्रालय और सेना मिलकर काम कर रहे हैं.

विश्व की दूसरी सबसे बड़ी पैदल सेना पाकिस्तान और चीन के साथ सीमा पर तनाव समेत बढ़ते सुरक्षा संबंधी खतरों के मद्देनजर विभिन्न हथियार प्रणालियों की जल्द से जल्द खरीदारी करना चाह रही है. खरीदारी प्रक्रिया शुरू करने के साथ ही सरकार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को यह संदेश भेजा है कि वह विभिन्न छोटे हथियारों खासकर हल्की मशीन गन पर अपने काम में तेजी लाए.

कुछ ही महीने पहले रक्षा मंत्रालय ने 7.62 कैलिबर के तोप की निविदा रद्द कर दी थी क्योंकि कई फील्ड ट्रायल के बाद इसका इकलौता विक्रेता ही बचा था. योजना शुरुआत में करीब 10,000 एलएमजी की खरीद की है. सेना ने नई 7.62 मिमी असॉल्ट राइफल की विशेषताओं को भी अंतिम रूप दे दिया है और ऐसी उम्मीद है कि खरीद संबंधी फैसला लेने वाली रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च संस्था रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) बहुप्रतिक्षित खरीद को जल्द ही मंजूरी दे देगी.

ईशापुर की सरकारी राइफल फैक्टरी में निर्मित असॉल्ट राइफल को जून में सेना ने अस्वीकार कर दिया था. ये गनें फायरिंग परीक्षण में बुरी तरह नाकाम रही थी. असॉल्ट राइफलों की खरीदारी में विभिन्न कारणों से देरी हुई जिसमें इसकी विशेषताओं को अंतिम रूप देने में सेना की नाकामी भी शामिल है. सेना को अपनी इन्सास राइफलों की जगह लेने के लिए 7.6×51 मिलीमीटर की करीब सात लाख असॉल्ट राइफलों की जरूरत है.

सेना ने पिछले वर्ष सितंबर में राइफलों के लिए सूचना का अनुरोध (आरएफआई) जारी किया था और इस पर करीब 20 कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई थी. आरएफआई एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य विभिन्न विक्रेताओं की क्षमताओं के बारे में जानकारी जुटाना होता है.

जून माह में सेना ने करीब 44,600 कार्बाइन की खरीदारी की शुरुआती प्रक्रिया प्रारंभ की थी. इकलौते विक्रेता के रह जाने पर आठ महीने पहले निविदा रद्द कर दी गई थी. इस आरएफआइ पर कुछ वैश्विक हथियार निर्माताओं समेत करीब आधा दर्जन फर्मों ने दिलचस्पी दिखाई थी.

सेना के सूत्रों ने बताया कि एलएमजी और लड़ाकू कार्बाइन के लिए विभिन्न विशेषताओं में बदलाव किया गया था ताकि केवल एक ही विक्रेता के रह जाने जैसी समस्या पेश ना आए. एक अधिकारी ने बताया कि एलएमजी, असॉल्ट राइफल और कार्बाइन की संयुक्त लागत करीब 40,000 करोड़ रुपये आएगी.

हाल में सम्पन्न सैन्य कमांडरों के सम्मेलन में इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा हुई. इस दौरान यह महसूस किया गया कि सेना का आधुनिकीकरण देश के समक्ष मौजूद सुरक्षा संबंधी खतरों के अनुरूप होना चाहिए. सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने सेना से कहा था कि बल का आधुनिकीकरण सरकार के लिए प्राथमिकता है और लड़ाकू क्षमता को मजबूत करने के लिए सभी कमियों का समाधान निकाला जाएगा.

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