ईरान के साथ परमाणु समझौता खत्म कर सकते है ट्रंप

ईरान के साथ परमाणु समझौता खत्म कर सकते है ट्रंप

ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने ईरानी परमाणु समझौते को अमान्य घोषित करने की बात कही थी. समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने समाचार एजेंसी तसनीम के हवाले से बताया कि जरीफ ने शनिवार (7 अक्टूबर) को कहा कि ट्रंप की चेतावनियां क्षेत्र में सुरक्षा और शांति कायम करने में मददगार साबित नहीं होगी और इससे अमेरिका के दीर्घकालिक हितों को नुकसान होगा. ट्रंप ने अगले सप्ताह ईरान के परमाणु समझौते को लेकर अपना समर्थन वापस लेने की धमकी दी है. ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान हुए इस ईरान परमाणु समझौते को ‘अब तक का सबसे खराब समझौता’ और अमेरिका के लिए एक ‘शर्मिदगी’ बताया है.

जरीफ ने शनिवार को कहा, “मुझे लगता है कि यह एक दुर्भावानपूर्ण बयान है क्योंकि निश्चित रूप से कोई भी समझौता सभी पक्षों के लिए एकदम सही नहीं होगा.” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अगर समझौते का उल्लंघन करता है तो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय उस पर दोबारा भरोसा नहीं कर सकता. जरीफ ने कहा कि परमाणु समझौता 10 साल के मान-मनौवल और दो साल की वार्ता का परिणाम है, दुर्भाग्य से यह सरकार फिर से उसी दिशा में वापस जा रही है.

ट्रंप 15 अक्टूबर को कांग्रेस के समक्ष इस बात की पुष्टि करेंगे कि क्या ईरान समझौते का पाल कर रहा है और क्या यह समझौता अमेरिका के हितों के अनुरूप है. यदि वह यह फैसला करते हैं कि यह समझौता अमेरिकी हितों के अनुरूप नहीं है तो इससे अमेरिकी सांसदों के समक्ष ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाने का रास्ता खुल सकता है, जिस वजह से यह समझौता खत्म हो जाएगा. ट्रंप काफी लंबे समय से ईरान परमाणु समझौते की आलोचना करते रहे हैं. यह समझौता ईरान और विश्व के छह देशों ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, रूस, अमेरिका और जर्मनी के बीच जुलाई 2015 में हुआ था.

ईरानी राष्ट्रपति हसन रोहानी बोले, 10 ट्रम्प भी परमाणु समझौते के फायदे वापस नहीं ले सकते

इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति ने 2015 में विश्व शक्तियों के साथ हुए परमाणु समझौते का बचाव करते हुए कहा था कि दस डोनाल्ड ट्रम्प मिलकर भी उनके देश को मिले इसके लाभ वापस नहीं ले सकते. हसन रूहानी की टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प समझौते को रद्द करने के अपने चुनावी वादे से पीछे हटते और इसकी जगह ईरान के खिलाफ दूसरे उपाय करने की दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं. रूहानी ने तेहरान विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमें जो लाभ मिले हैं, उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता. उन्हें कोई वापस नहीं ले सकता, ना तो ये ट्रम्प और ना ही इनके जैसे 10 और ट्रम्प.’’ ईरान ने समझौते के तहत अपने विवादित परमाणु कार्यक्रम पर कुछ प्रतिबंधों को स्वीकार किया है और बदले में उसे देश के तेल निर्यात सहित अन्य के खिलाफ लगे प्रतिबंधों को हटाने से लाभ मिले. ट्रम्प के ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड तथा ईरान समर्थित शिया आतंकी समूह हिज्बुल्ला के खिलाफ नयी कार्रवाई करने की संभावना है.

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