अब्दुल करीम तेलगी

बीस हजार करोड़ रुपये के फर्जी स्टांप पेपर घोटाले के दोषी अब्दुल करीम तेलगी की बुधवार को मौत हो गई। मस्तिष्क ज्वर (इंसेफेलाइटिस) से पीड़ित तेलगी को कुछ दिन पहले यहां सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

उसके सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद उसे वेंटीलेटर पर रखा गया था। पुलिस ने बताया कि तेलगी (56) की विक्टोरिया अस्पताल में शाम करीब 3ः55 बजे मृत्यु हो गई है।

डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होते समय से ही उनकी हालत नाजुक थी। तेलगी को इंसेफेलाइटिस के अलावा और भी कई बीमारियां थीं। वह 20 वर्षों से मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित थे।

उन्हें एड्स समेत कई अन्य रोग भी थे। फर्जी स्टांप पेपर घोटाले में 2006 में तेलगी को 30 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। कोर्ट ने 202 करोड़ रुपये का जुर्माना भी ठोका था। वह बेंगलुरु की पारापाना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में 16 वर्षों से बंद थे। फर्जी स्टांप पेपर मामले में तेलगी को नवंबर 2001 में अजमेर से गिरफ्तार किया गया था।

ऐसे किया घोटाला

तेलगी ने फर्जी स्टांप पेपर बेचने के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को अपने गैंग में शामिल किया। एमबीए किए युवा वित्तीय संस्थानों और बड़े-बड़े निजी संगठनों से संपर्क कर मोटे कमीशन का लालच देते थे।

इससे आसानी से फर्जी स्टांप बिक जाते थे। वह फर्जी स्टांप पेपर छापता था। उसका दावा था कि नासिक सिक्योरिटी प्रेस, स्टांप आफिस और राजस्व मंत्रालय के कई अधिकारियों से उसके दोस्ताना संबंध थे।

बेंगलुरु में 2000 में फर्जी स्टांप पेपर लेकर जाते हुए दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले की परतें खुलनी शुरू हो गईं। घोटाले में कई पुलिस अधिकारी और नेताओं के नाम भी सामने आए थे।

ट्रेन में सब्जी बेचते-बेचते बन गया बड़ा घोटालेबाज

रेलवे कर्मचारी के बेटे तेलगी ने कॅरियर की शुरुआत ट्रेनों में सब्जी और फल बेचने से की थी। बाद में शातिर दिमाग से अरबों रुपयों की संपत्ति खड़ी की तथा अपने समय का सबसे बड़ा घोटालेबाज बन गया।

मूल रूप से कर्नाटक के बेलगावी के रहने वाले तेलगी ने सर्वोदय स्कूल से पढ़ाई की थी। उसका जीवन तब बदला, जब वह पैसा कमाने सात साल के लिए सऊदी अरब गया।

लौटने पर वह पूरी तरह बदल चुका था। उसने स्टांप पेपर बेचने का लाइसेंस हासिल किया। यहीं से उसका गोरखधंधा शुरू हो गया।

उसने बैंकों, बीमा कंपनियों और स्टाक ब्रोकरेज फर्मों को फर्जी स्टांप बेचे और दस वर्षों में देश को करीब 30,000 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। हालांकि आधिकारिक रूप से यह 20,000 करोड़ रुपये का घोटाला कहा जाता है।

 

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