सुनील गावस्कर

इन दो खिलाडियों को टीम में देखना चाहते है सुनील गावस्कर

टीम इंडिया इस वक्त अपने बेहतरीन दौर से गुजर रही है. टीम के खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर दुनियाभर में अपना दबदबा बना रहे हैं, लेकिन फिर भी टीम एक परेशानी से जूझ रही है. टीम की यह परेशानी है- बल्लेबाजी का मध्यक्रम. हाल ही में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई सीरीज में टीम इंडिया की कमी साफतौर पर उजागर हुई है. हालांकि, मध्यक्रम बल्लेबाजी को लेकर काफी वक्त से कोशिशें जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकल पाया है.

बता दें कि 2015 के वर्ल्ड कप के बाद से बल्लेबाजी में चौथे नंबर की पोजिशन के लिए कम से कम 11 खिलाड़ियों को आजमाया गया है, लेकिन अभी तक कोई फाइनल नहीं हो पाया है. चयनकर्ता, कोच और कप्तान की नजरें इस समय 2019 के वर्ल्ड कप पर टिकी हैं. वे लगातार टीम के संयोजनों पर काम कर रहे हैं. इसी का नतीजा है कि हर मैच में एक नए खिलाड़ी को इस पोजिशन पर खिलाया जा रहा है, लेकिन कुछ खास नतीजा नहीं निकल सका है.
ऐसे में क्रिकेट लीजेंड सुनील गावस्कर को लगता है कि टीम इंडिया में इस परेशानी से निपटने के लिए इन दो खिलाड़ियों को वापस आ जाना चाहिए. गावस्कर ने चयनकर्ताओं को कुछ पुराने खिलाड़ियों को फिर से मौका देने की सलाह दी है.

गावस्कर का कहना है कि, इन खिलाड़ियों को टीम में शामिल करके शायद इस समस्या का हल निकाला जा सकता है. गावस्कर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 में टीम इंडिया की जीत के बाद कहा था कि, ”भारतीय टीम के लड़खड़ाते मध्यक्रम को संभालने के लिए टीम में सुरेश रैना और युवराज सिंह की वापसी होनी चाहिए.”

पूर्व कप्तान का कहना है कि, ”पहले तो मध्यक्रम में अनुभवी बल्लेबाज होंगे. दूसरा टीम में बांए हाथ के बल्लेबाजों की कमी है और ये दोनों खिलाड़ी इन कमियों को पूरा कर देंगे.”

गावस्कर ने ये भी कहा कि, ”ये दोनों खिलाड़ी मध्यक्रम को संभालने के अलावा गेंदबाजी में भी अच्छा योगदान कर सकते हैं. हालांकि, वो वैकल्पिक समाधान है लेकिन मध्यक्रम में एक बाएं हाथ के बल्लेबाज की जरुरत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.”
बता दें कि फिलहाल टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाज के नाम पर सिर्फ शिखर धवन हैं और वह भी पारी की शुरुआत करते हैं. इसके अलावा सभी बल्लेबाज दाएं हाथ के हैं. मैदान पर बाएं और दाएं हाथ के बल्लेबाजों की जोड़ी विरोधी टीम के लिए परेशानी खड़ी करती है, लेकिन टीम इंडिया ऐसा करने में नाकाम साबित हो रही है.

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