महाकाल मंदिर

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में अब शिवलिंग पर सिर्फ़ शुद्ध आरओ जल से ही अभिषेक किया जा सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के शिवलिंग के क्षरण की जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वे (एएसआई) और भारतीय भूगर्भ सर्वे (जीएसआई) के विशेषज्ञों की समिति नियुक्त की थी.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने समिति की सिफ़ारिशों को मंदिर बोर्ड की सहमति के बाद मंज़ूरी दे दी है. मंदिर की प्रशासनिक समिति से जुड़े प्रदीप सोनी ने कहा “विशेषज्ञ समिति की सिफ़ारिशों से मंदिर बोर्ड ने सहमति जताई और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इन्हें मान लिया है.”
उन्होंने कहा, “मंदिर बोर्ड शुद्ध आरओ जल की व्यवस्था करेगा लेकिन ये सिफ़ारिशें कल से ही लागू नहीं हो जाएंगी इसमें कुछ दिनों का समय लगेगा.”
उन्होंने कहा, “मंदिर बोर्ड पहले से ही कई तरह की व्यवस्थाएं शिवलिंग की सुरक्षा के लिए कर चुका है.” भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल मंदिर के शिवलिंग पर मिलावटी दूध और पंचामृत चढ़ाने से क्या नुक़सान हुए हैं इसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ये समिति नियुक्त की थी.

समिति ने उज्जैन जाकर जांच की थी और शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले जल के नमूने भी लिए थे. सामाजिक कार्यकर्ता सारिका गुरू की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समिति से शिवलिंग की सुरक्षा के लिए सिफ़ारिशें देने के लिए भी कहा था.
ऐतिहासिक मंदिर

महाकाल मंदिर की वेबसाइट के मुताबिक ये मंदिर कब अस्तित्व में आया इसकी सटीक जानकारी मौजूद नहीं है लेकिन माना जाता है कि प्रागैतिहासिक काल में ये मंदिर अस्तित्व में आया. पुराणों में बताया गया है कि सबसे पहले इसे प्रजापिता ब्रह्मा ने स्थापित किया था.

मंदिर की देखभाल के लिए राजा चंदा प्रद्योता के राजकुमार कुमारासेना को छठी शताब्दी ईसा पूर्व में नियुक्त करने के संदर्भ भी मिलते हैं

SOURCE- BBC

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *