जयराम ठाकुर

जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे। जयराम हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक तौर पर महत्वूपर्ण मंडी क्षेत्र के पहले नेता हैं जो मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। मंडी में ज्यादा सीटें होने के कारण उसे अहम माना जाता है।

मंडी की सेराज विधानसभा सीट से पांचवीं बार विधायक बने 52 साल के जयराम हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल की शर्मनाक हार के बाद राज्य के शीर्ष पद के दावेदारों की रेस में शामिल हो गए। धूमल शनिवार रात तक दावेदारों की रेस में मजबूती से डटे थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए।

पार्टी विधायकों के एक धड़े ने पूर्व मुख्यमंत्री धूमल का समर्थन किया था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा भी मुख्यमंत्री पद की रेस में आगे चल रहे थे। प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और धूमल की अगुआई वाली राज्य सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री का पद संभाल चुके जयराम राजपूत नेता हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का करीबी समझा जाता है।

हिमाचल प्रदेश के अब तक के ज्यादातर मुख्यमंत्री शिमला, कांगड़ा और सिरमौर इलाके से होते थे। मंडी में 10 विधानसभा सीटें हैं जबकि कांगड़ा में 15 विधानसभा सीटें हैं। इस विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मंडी की 10 में से नौ सीटों पर कब्जा जमाया था। सुर्खियों से दूर रहने वाले जयराम मंडी के एक किसान परिवार से आते हैं।

उन्होंने चंडीगढ़ की पंजाब यूनिर्विसटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की और यूनिर्विसटी के दिनों में ही राजनीति में कदम रखने का फैसला किया। जयराम ने 1993 का हिमाचल विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा। 1993 के चुनाव में तो वह हार गए, लेकिन उसके बाद के सारे विधानसभा चुनाव उन्होंने जीते हैं।

मृदुभाषी माने जाने वाले जयराम की ताकत यह है कि उन्हें एक ऐसे नेता के तौर पर देखा जा रहा है जिसने राज्य में पार्टी के अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन स्थापित करने में सफलता पाई है। नए विधायकों के बीच आम सहमति नहीं बन पाने के कारण दो केन्द्रीय पर्यवेक्षकों, केन्द्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण और नरेन्द्र सिंह तोमर को इस मुद्दे को केन्द्रीय नेतृत्व के साथ दोबारा विचार विमर्श करने के लिए शिमला से दिल्ली लौटना पड़ा।

केंद्रीय पर्यवेक्षकों का दो सदस्यीय दल राज्य में 21 और 22 दिसंबर को मौजूद था और उन्होंने राज्य भाजपा की कोर कमेटी के सदस्यों , सांसदों और कुछ विधायकों की राय ली थी। गौरतलब है कि भाजपा ने 68 सीटों में से 44 सीटों पर जीत दर्ज कर कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया है।

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