नार्थ कोरिया से युद्ध

इस्लामाबाद की कथित मदद से एक कनैडियन-अमेरिकी जोड़े और उसके 3 बच्चों की 5 साल बाद आतंकियों के कब्जे से रिहाई के बाद ट्रंप प्रशासन ने नाटकीय अंदाज में पाकिस्तान में ड्रोन हमलों को तेज किया है।

2010 के बाद से ही इतने ज्यादा और तीव्रता वाले ड्रोन हमले नहीं हो रहे थे लेकिन अब पहले जैसे हमले फिर शुरू हो गए हैं। बंधक संकट खत्म होने के बाद दोनों ही देश भले ही रिश्तों को लेकर अच्छी-अच्छी बातें कर रहे हों लेकिन ड्रोन हमलों में तेजी से जाहिर है कि दोनों देशों के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है।

कनैडियन-अमेरिकी जोड़े को पाकिस्तानी सेना ने आतंकियों के कब्जे से मुक्त कराया। पहले दावा किया गया कि जब पाकिस्तानी सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया उस वक्त जोड़े को पाक-अफगान बॉर्डर पर ले जाया जा रहा था और उस दौरान सेना और तालिबान के खिलाफ गोलीबारी भी हुई।

‘रेस्क्यू’ कथित तौर पर अमेरिकी खुफिया सूचनाओं पर आधारित था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने बंधकों के लोकेशन के बारे में सूचना दी थी जिसके बाद कार्रवाई करते हुए पाकिस्तानी सेना ने उन्हें मुक्त कराया। उस दौरान हुए झड़प में बंधक बनाने वाले आतंकी या तो मार दिए गए या फिर जान बचाकर भाग गए।

पाकिस्तान ने दावा किया था कि कनैडियन-अमेरिकी दंपती और उनके 3 बच्चे अफगानिस्तान में बंधक बनाए गए थे। लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस्लामाबाद को तब शर्मशार किया जब उसने सार्वजनिक तौर पर कहा कि पाकिस्तान झूठ बोल रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस और सीआईए के डायरेक्टर माइक पोंपियो दोनों ने कहा कि दंपती (और उनके तीनों बच्चों) को पाकिस्तान में बंधक बनाया गया था न कि अफगानिस्तान में।

वाइट हाउस की तरफ से जारी बयान में कहा, ‘उपराष्ट्रपति ने अब्बासी (पाकिस्तान के प्रधानमंत्री) को अमेरिकी और कनाडाई बंधकों को मुक्त कराने में उनकी सरकार के सहयोग के लिए शुक्रिया कहा है। उन्हें हक्कानी तालिबान नेटवर्क ने पाकिस्तान के जनजातीय इलाके में बंधक बनाया था।’

उपराष्ट्रपति की तरफ से जारी बयान में अफगानिस्तान का कहीं कोई जिक्र नहीं था। सीआईए डायरेक्टर माइक पोंपियो ने भी पुष्टि की कि दंपती को पाकिस्तान के भीतर ही बंधक बनाकर रखा गया था।

कनाडाई-अमेरिकी दंपती 5 साल से ज्यादा वक्त तक आतंकियों के कब्जे में थे। उन्हें छुड़ाने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाया जिससे आखिरकार बंधकों की रिहाई सुनिश्चित हुई।

दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उनके सलाहकारों ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी थी कि अब वक्त आ गया है कि इस्लामाबाद के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

अमेरिका के सख्त तेवरों से घबराए पाकिस्तान ने आखिरकार बंधकों की रिहाई सुनिश्चित की।

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